उपभोक्ता व्यवहार की विशेषता और प्रकार

उपभोक्ता व्यवहार की विशेषताएँ

1. उपभोक्ता व्यवहार के अंतर्गत दो निरीक्षण करने योग्य भौतिक क्रियाएँ शामिल हैं। जैसे बाजार में घूमते हुए, व्यापारिक उत्पादों कानिरीक्षण तथा क्रय एवं अन्य क्रिया जैसे उत्पाद को समझने की स्थिति निर्मित करना और किन्हीं निश्चित उत्पादों को प्राथमिकता देना।

2. उपभोक्ता व्यवहार बहुत ही जटिल तथा अनोखा अतः परिवर्तनशील प्रबंधन को भी परिवर्तन के साथ समायोजन की जरूरत है अन्यथा बाजार घाटे में जा सकता है।

3. बाजार में किसी व्यक्ति का निश्चित व्यवहार, आंतरिक कारकों जैसे आवश्यकताएँ, प्रवृत्ति, सिद्धांत तथा रवैया, इसके साथ ही बाहरी अथवा वातावरणीय कारकों जैसे परिवार, सामाजिक समूह, आर्थिक संस्कृति तथा व्यापारिक प्रभाव आदि के द्वारा व्यक्ति का व्यवहार प्रभावित किया जाता है।

4. उपभोक्ता व्यवहार में वे भौतिक तथा मानसिक क्रियाएँ सम्मिलित होती हैं जो उपभोक्ता उत्पाद और सेवाएं, जो उसे संतुष्ट करते हैं, को प्राप्त करने हेतु प्रयत्न करता है।

उपभोक्ता व्यवहार के प्रकार

उपभोक्ता व्यवहार क्रय व्यवहार के साथ बदलते हैं। एक टूथपेस्ट, टेनिस रेकेट, पर्सनल कम्प्यूटर एवं एक नई कार खरीदने के बीच अधिक अंतर होता है। अधिक जटिल तथा महंगे निर्णयों द्वारा क्रेता के विचारों और क्रय हिस्सेदारों को ज्यादा शामिल किए जाने की संभावना है। एसेल ने 4 तरह के उपभोक्ता क्रय व्यवहारों में भेद किया है जो क्रय में क्रेता को संलग्नता के अंश तथा ब्राण्डों के बीच भिन्नताओं के अंश पर आधारित हैं।


1 . जटिल क्रय व्यवहार माध्यम पर जा सकता है, जब वे किसी विशेष ब्राण्ड के क्रय में अत्यधिक शामिल होते हैं तथा उत्पादों के बीच आवश्यक अंतर से सचेत होते हैं। उपभोक्ता क्रय करने में बहुत ज्यादा सम्मिलित या सचेत होते हैं जब यह क्रय बहुत महंगा, तथा कभी-कभी किया जाने वाला या जोखिमपूर्ण या अर्थपूर्ण होता है। एक उपभोक्ता किसी उत्पाद की श्रेणी के बारे में ज्यादा नहीं जानता, इसलिए उसे बहुत कुछ सीखना है। उदाहरण के के लिए एक व्यक्ति जो पर्सनल कम्प्यूटर खरीद रहा है, वह यह नहीं जान पाता कि कम्प्यूटर खरीदते समय किन विशेषताओं को देखना चाहिए।

यह क्रेता अनुभवशील सीखने की प्रक्रिया से गुजरेगा। यह उत्पाद के बारे में पैदा होने वाले प्रथम विश्वास द्वारा अभिलक्षित किया जाता है, इसके बाद उत्पाद के प्रति रवैया कैसा है, इसके बारे में सोच जाता है, इसके बाद सोच-विचार कर क्रय किया जाता है। किसी अत्यधिकबिक्री योग्य (या ऐसा उत्पाद जिससे उपभोक्ता अत्यधिक संबद्ध हैं) उत्पाद के मार्केटर को सूचनाएं एकत्रण तथा ऐसे उपभोक्ता जो उत्पाद के साथ ज्यादा संलग्न हैं के मूल्यांकन व्यवहार को समझना पड़ता है। मार्केटर को एक रणनीति विकसित करने की जरूरत होती है जो क्रेता को उस श्रेणी के उत्पादों की विशेषताएं सीखने में सहायता करती है तथा इसके साथ ही यह महत्वपूर्ण है और यह रणनीति उसके उत्पादों को उच्च स्तर तक ले जाती है। वह प्रिंट मीडिया तथा सूची का उपयोग ब्राण्ड के लाभ बताने के लिए करता है कि उसके ब्राण्ड की विशेषताएं अलग हैं एवं वह मुख्य ब्राण्ड चुनाव को प्रभावित करने के लिए विक्रय संबंधी व्यक्तियों तथा उपभोक्ता के मित्रों को भी सूचीबद्ध करता है।

2. क्रय व्यवहार को कम करने वाले तत्व : कभी-कभी उपभोक्ता जो कय में अत्यधिक संलग्न है तथा उत्पादों में थोड़ा सा परिवर्तन देखता है, उसकी अत्यधिक संलग्नता इस तथ्य पर आधारित होती है कि क्रय महंगा, कभी-कभी किया जाने वाला तथा जोखिमपूर्ण है। उपभोक्ता उत्पाद की उपलब्धता देखने हेतु दुकानों पर जाएगा, पर वह उचित रूप से तथा शीघ्रता से उत्पाद खरीदेगा क्योंकि ब्राण्डों के भेद दुकानों पर नहीं बताए जाते हैं। वह सर्वप्रथम अच्छी कीमत को महत्व देगा अथवा उस स्थान या समय पर खरीदने में सुविधा को। उदाहरण कार्यालय का क्रय एक संलग्नतापूर्वक निर्णय है, क्योंकि यह बहुत खर्चीला तथा स्वयं की पहचान से संबंधित है। इसलिए क्रेता समान मूल्य श्रेणी में अधिक कारपेटिंग ब्राण्डों को देखेगा।

उपभोक्ता कालीन खरीदने के पश्चात् उसके कुछ बुरे लक्षणों के कारण बुरा अनुभव कर सकता है अथवा अन्य कालीन के बारे में अच्छा सुनने को लेकर, अब वह अधिक सीखना शुरू करता है ताकि वह अपने निर्णयों में बुराइयों को कम कर सके। वह सर्वप्रथम व्यवहार की एक दशा  गुजरता है, कुछ नए भरोसे अर्जित करता है तथा आखिर में इस बात के साथ अंत करता है कि उसका मूल्यांकन उसके चुनाव के अनुकूल है। इस स्थिति में मूल्य निर्धारण, अच्छा स्थान, प्रभावी विक्रय कर्मचारी ब्राण्ड के चुनाव को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण होते हैं। मार्केटिंग कम्युनिकेशन का महत्वपूर्ण भाग उपभोक्ता को क्रय करने के पश्चात् उसके निर्णय के बारे में अच्छा महसूस कराना है।

3. आदतों पर आधारित क्रय व्यवहार : कई उत्पाद उपभोक्ता की कम संलग्नता तथा महत्वपूर्ण ब्राण्ड भिन्नता के बगैर खरीदे जाते हैं।उदाहरण के लिए नमक खरीदते समय इसकी उत्पाद श्रेणी में उपभोक्ता कम शामिल होता है। वह दुकान पर जाता है एवं मजबूत विश्वास न होने के बाद भी ब्राण्ड खरीदता है क्योंकि उपभोक्ता कम लागत वाले उत्पाद के साथ संलग्न होते हैं तथा लगातार उत्पाद खरीदता है। इस मामले में उनका व्यवहार साधारण/संक्षिप्त रूप से ही आगे बढ़ता है, क्योंकि वह उत्पाद के बारे में विस्तृत जानकारी पता नहीं लगाते हैं। वह उसकी विशेषताएँ मूल्यांकित करते हैं तथा किस उत्पाद को खरीदना है इस पर एक विचारपूर्ण निर्णय लेते हैं। वह वही जानकारी प्राप्त करते हैं जैसा वह टेलीविजन पर देखते हैं अथवा अखबार में पढ़ते हैं। विज्ञापन का पुनरावर्तन ब्राण्ड में भरोसे की बजाय ब्राण्ड समानता को बढ़ाता है। उपभोक्ता ब्राण्ड चुनाव की एक स्थिति नहीं बनाते, वह ब्राण्ड को सिर्फ उसकी परिचितता के आधार पर क्रय करते हैं, क्रय करने के बाद वह मूल्यांकन भी नहीं कर सकते, क्योंकि वह उत्पाद के साथ संलग्न नहीं होते। इसलिए खरीदने की प्रक्रिया में, उत्पाद पर भरोसा धैर्ययुक्त जानकारी द्वारा निर्मित किया जाता है तथा यह क्रय व्यवहार द्वारा
अनुसरित किया जाता है, जो कि मूल्यांकन द्वारा निर्मित किया अथवा नहीं किया जा सकता।

क्रय संलग्नता के मामले में मार्केटर कुछ विभिन्न ब्राण्डों के साथ कीमतों तथा बिक्री को बढ़ाने में क्रय संलग्नता को प्रभावी मानते हैं और विक्रय वृद्धि उत्पाद को जांचने हेतु एक उद्दीपक की तरह होते हैं। एक कम संलग्नता वाले उत्पाद के विज्ञापनों में कई बातें निरीक्षित की जानी चाहिए, विज्ञापन सिर्फ कुछ महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर ही जोर देते हैं। दृश्य संकेत तथा प्रतिरूप महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि यह सरलता से याद रखे तथा ब्राण्ड के साथ जोड़े जा सकते हैं। विज्ञापनों का कम समयावधि वाले संदेशों के साथ ज्यादा पुनरावर्तन किया जाना चाहिए। अखबार या प्रिंट मीडिया की बजाय अधिक प्रभावशाली होती है, जो जानकारी हेतु महत्वपूर्ण होती है। विज्ञापन की योजना श्रेष्ठ परिस्थितियों पर आधारित होना चाहिए। इससे क्रेता निश्चित उत्पाद को पहचानने लगता है एवं इससे शीघ्रता से जुड़ जाता है।

मार्केटर कुछ संलग्न मुद्दों के द्वारा एक कम संलग्नता वाले उत्पाद को ज्यादा संलग्नता वाले उत्पाद में परिवर्तित कर सकता है, जैसे क्रेस्ट टूथपेस्ट को किसी व्यक्ति के दांतों को स्वस्थ रखने से जोड़ा जा सकता है। उत्पादों को कुछ व्यक्तिगत परिस्थितियों के साथ जोड़ा जा सकता है। उदाहरण-काफी के ब्राण्ड का जल्दी सुबह प्रसारण जब उपभोक्ता नींद को दूर करने हेतु कुछ उपाय ढूंढता है, वह विज्ञापन के द्वारा उन भावनाओं को निशाना बनाते हैं, जो व्यक्ति की सोच अथवा इसके गर्व की रक्षा के साथ जुड़ी होती हैं, एक महत्वरहित वाले उत्पाद के साथ कुछ महत्वपूर्ण बातें जोड़ी जा सकती हैं। जैसे स्वादिष्ट पेय विटामिन के साथ।
यह रणनीतियां उपभोक्ता की कम संलग्नता को एक संयमित संलग्नता तक लाती हैं। वे उपभोक्ता को जटिल व्यवहार की तरफ प्रवृत्ति नहीं करते।

4. परिवर्तन खोजी उपभोक्ता व्यवहार : क्रय की कुछ
परिस्थितियां उपभोक्ता की न्यून संलग्नता पर विशेष ब्राण्ड भिन्नता को वर्णित करती हैं। उपभोक्ता ब्राण्ड परिवर्तन करते हुए कम ही देखे जाते हैं। उदाहरण-बिस्किट खरीदने हेतु उपभोक्ता के पास कुछ विश्वास होता है, वह बिस्किट के एक ब्राण्ड को बगैर मूल्यांकन किए चुनता है और वह इसका मूल्यांकन इसे उपयोग करते समय करता है। भविष्य में, उपभोक्ता नीरसता अथवा कुछ अन्य इच्छा के कारण या परीक्षण के लिए. कोई अन्य ब्राण्ड ले सकता है, यहां पर ब्राण्ड का बदलाव असंतुष्टिकरण की अपेक्षा
परिवर्तन हेतु होता है।

इस उत्पाद श्रेणी एवं निम्न ब्राण्डों में मार्केटियर हेतु मार्केटिंग की रणनीति अलग रहती है। जो क्रय के व्यवहार की आदतों को शेल्फ में उपस्थित खाली जगह पर प्रभुत्व की रणनीति के द्वारा प्रोत्साहित करते हैं। इन्हीं रणनीतियों द्वारा मार्केटियर माल खत्म होने की परिस्थितियों को कम करेंगे तथा उन्हीं रणनीतियों के अंतर्गत बर-बार दिखाए जाने वाले विज्ञापनों को उत्पन्न किया जाता है। दूसरे शब्दों में, प्रतियोगी फर्म कम कीमतें प्रदान करके परिवर्तन ढूंढने वाले उपभोक्ता को कूपन, मुफ्त नमूने देकर प्रोत्साहित करेगी।

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