चयन के घटक


अर्थ एवं परिभाषा

चयन करने का अर्थ है पसद करना। चयन व्यक्तियों को वाछित योग्यता एवं अहिता के आधार पर संगठन में कार्य करन हतु छाटन की प्रक्रिया है।

डेल योडर के अनुसार चयन वह प्रक्रिया है जिसमें उम्मीदवारों को दो वर्गों में बाँटा गया है वे जिन्हें रोजगार के लिये आमंत्रित किया गया है तथा दूसरे वे जिन्हें नहीं।

थामस स्टोन के अनुसार चयन वह प्रक्रिया है जिसमें उम्मीदवारों में अंतर यह पहचान करने के लिये किया जाता है कि कौनसे कार्य सफलता प्राप्त करने के ज्यादा संभावित हो सकते हैं।

अतः चयन प्रक्रिया प्रबंधन हाथों में वह औजार है जो योग्य एवं अयोग्य उम्मीदवारों में विभिन्न तकनीकों जैसे साक्षात्कार परीक्षा आदि से अंतर करता है। इस परिप्रेक्ष्य में यह रोजगार की एक नकारात्मक प्रक्रिया है जिसमें कुछ ही कार्य के लिये योग्य होते हैं उन्हें रोजगार प्रदाय किया जाता है एवं दूसरों को इस अवसर से वंचित किया जाता है। एक मजबूत चयन नीति उपयुक्त उम्मीदवारों के चयन को निश्चित करती है।

चयन तथा भर्ती में अन्तर  :-

हालांकि चयन तथा भर्ती का एक दूसरे से घनिष्ठ सम्बन्ध है पर कुछ आधारभूत अंतर इस तरह हैं

1.चयन एक नकारात्मक प्रक्रिया है जिसमें बड़ी संख्या में आवेदकों को नकार दिया जाता है जबकि भर्ती एक सकारात्मक प्रक्रिया है जिसमें सभी के आवेदन प्राप्त किए जाते हैं।

2.भर्ती में मानव शक्ति के स्रोत को पहचाना जाता है वहीं चयन
प्राप्त आवेदनों में से सर्वाधिक उपयुक्त को चुनना है।

3.तकनीकी रूप से भर्ती चयन के पहले की क्रिया है। भर्ती के बगैर चयन कर पाना संभव नहीं है।

4.भर्ती का अर्थ खोजना है वहीं चयन का अर्थ तुलना करना है।

चयन की पद्धति:

चयन पद्धति विधियों की श्रृंखला या कदमों या स्थितियों से बनी होती है जिसके द्वारा आवेदक को अतिरिक्त जानकारी प्राप्त होती है।प्रत्येक स्थिति में तथ्य प्रकाश में आ सकते हैं जो उम्मीदवार या आवेदक को निरस्त कर सकती है। चयन पद्धति की उस बेरियर या रुकावट से तुलना की जा सकती है जिसे एक आवेदक को अंतिम रूप से चयन के पहले लांघना पड़ता है।

चयन पद्धति की अनिवार्यता:-

चयन पद्धति ऐसी तैयार की जानी चाहिए जो संगठन
आवश्यकताओं से मेल खाए। पद्धति सफल होगी यदि यह निम्न जरूरतों को संतुष्ट करें:

1.आवेदकों की समुचित संख्या होना चाहिए जिसमें से आवश्यक संख्या में उम्मीदवारों का चयन किया जाता है। चयन उचित नहीं होगा यदि उम्मीदवारों की संख्या कम होगी।

2.कुछ व्यक्ति होना चाहिए जिन्हें चयन करने का अधिकार दिया गया हो। अधिकारिता व्यक्तियों के प्रकार के आधार पर दी जाती है एवं कार्य की प्रकृति पर जिसे वे करेंगे।

3.उम्मीदवार का एक स्तर तय होना चाहिए जिससे एक भावी कर्मचारी की तुलना की जा सके अर्थात् कार्य विश्लेषक द्वारा विकसित एक व्यापक कार्य विशिष्टता उपलब्ध होनी चाहिए।

चयन पद्धति का महत्त्व:-

किसी संगठन की सफलता उसके द्वारा चयनित व्यक्तियों के गुणों पर आधारित होती है। अत कर्मचारी का चयन प्रबंधन का बहुत महत्त्वपूर्ण कार्य है। चयन का महत्त्व निम्न कारकों से आंका जा सकता है।

1. कुशल कर्मचारियों को प्राप्त करना केबल उपयुक्त
उम्मीदवार जो कार्य के लिये ठीक हो का भावी उम्मीदवारों में से रोजगार के लिये चयन किया जाता है। इस तरह चयन वह प्रक्रिया है जिसमें वांछित उम्मीदवारों को नौकरी पर लिया जाता है अन्यों को अवसर से वंचित किया जाता है।

2. प्रशिक्षण की लागत में कमी : उम्मीदवारों का उचित रूप से चयन प्रशिक्षण की लागत कम कर देता है क्योंकि

1. योग्य कर्मचारियों में बेहतर सीखने की शक्ति होती है, वे बिना ज्यादा समय में कार्य की तकनीकों को अच्छी तरह से समझ सकते हैं।

2. संगठन उनके व्यक्तिगत अंतर के आधार पर विभिन्न व्यक्तियों के लिए विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार कर सकता है जिसके समय एवं प्रशिक्षण की लागत कम हो सके।

3.कर्मचारियों की समस्याओं का हल : कर्मचारियों का उचित चयन उनकी समस्याओं को संगठन में कम कर सकता है। कई समस्याएं जैसे श्रम परिवर्तन, अनुपस्थिति एवं एकरसता या नीरसता का संगठन में अनुभव तोब्रता से नहीं होगा। श्रम संबंध अच्छे होंगे क्योंकि कर्मचारी कार्य से पूरी तरह संतुष्ट होंगे।

अत: उचित कर्मचारियों का चयन, प्रबंधन को लोगों से प्रभावी कार्य कराने में मदद करता है।

चयन हेतु संगठन :-

हाल ही तक, कई संगठनों में चयन बगैर योजना के रूप में दिया जाता था। विभागों द्वारा स्वयं के कर्मचारियों का परीक्षण कर रख लिया जाता था क्योंकि प्रबंधक आश्वस्त थे कि उनके लिए कोई भी वैसे कर्मचारी पसंद नहीं कर सकता जैसा वे खुद पूरी योग्यता से कर सकते थे किन्तु आजकल चित्र बदल गया है। चयन का केन्द्रीयकरण हो गया है और यह मानव संसाधन विभाग द्वारा निपटा जाता है।

केन्द्रीयकृत चयन के निम्न लाभ है.

1.आवेदक एकमात्र केन्द्रीयकृत विभाग को आवेदन भेजना आसान पाते हैं, बजाय आवेदनों को विभिन्न विभागों को भेजने के।

2.रोजगार से संबंधित सभी मुद्दे एक केन्द्रीय स्थान के द्वारा निपटाये जा सकते हैं।

3.विभागीय प्रबंधन अपने विभाग की जिम्मेदारियों पर ध्यान दे सकते हैं। केन्द्रीकृत चयन खासतौर से तीव्र रोजगारी की अवधि में मददगार होता है।

4.चयन को ज्यादा प्रभावी होना बाध्यता है क्योंकि यह अमले की तकनीकों में प्रशिक्षित विशेषज्ञों द्वारा किया जाता है।

5.आवेदक ज्यादा विभिन्नता वाले कार्यों पर विचार के प्रति आश्वस्त होगा।

6.प्रयासों का दोहरीकरण केन्द्रीकृत चयन के कारण कम होगा, जिसका परिणाम निम्नतर ठेके की लागत होगा।

7.सरकारी नियमों की चयन प्रक्रिया में बढ़ने में यह आवश्यक है कि जो व्यक्ति इन नियमों को जानते हैं, भर्ती प्रक्रिया के प्रमुख अंशों से निपट सकते हैं।

आदर्श रूप से भर्ती प्रक्रिया में आपसी निर्णय करना सम्मिलित रहता है। संगठन यह तय करता है कि रोजगार आमंत्रण किया जाये अथवा नहीं एवं आमंत्रण कितना आकर्षक हो। उम्मीदवार तय करता है कि प्रस्ताव तथा संगठन उसकी आवश्यकताओं एवं लक्ष्यों पर खरे उतरते हैं कि नहीं।

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