मानव व्यवहार के घटक

मानव व्यवहार के घटक –

मनोवैज्ञानिक तत्त्व

1. व्यक्तित्व : संगठन के किसी कार्य के लिए व्यक्ति की
उपयुक्तता का निर्धारण करते समय उसके व्यक्तित्व तत्त्वों को अवश्य ध्यान में रखना चाहिए। अन्य शब्दों में, जितने व्यक्ति होंगे उतने ही व्यक्तित्व भी होंगे। अत: व्यक्तित्व पर कोई एकमत नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति के लिए व्यक्तित्व का अलग अर्थ होता है। इस प्रकार व्यक्तित्व में व्यक्ति के दोनों आन्तरिक और बाहरी पहलू शामिल होते हैं। बाहरी पहलू में व्यक्ति की लम्बाई, weight, facial features, रंग और अन्य शारीरिक गुण होते हैं जबकि मनोवृत्ति, मूल्य, सीखना आदि व्यक्तित्व के आन्तरिक पहलू हैं। संगठनात्मक व्यवहार में व्यक्तित्व के आन्तरिक पहलुओं की अधिक महत्त है।

2.सोच : सोच वह कार्य है जिसके द्वारा व्यक्ति अपनी सोचों को एकत्रित करता है ताकि वह अपने आस-पास के वातावरण को कोई अर्थ दे सके। यह उस तरीके के बारे में बताता है जैसे वह व्यक्ति संसार के बारे अनुभव करता है। उदाहरण के तौर पर रेलवे का लिपिक एक अच्छी तरह से तैयार व्यक्ति को ऊंचे स्तर का सोचकर उससे अच्छी तरह बात करता है और कोई व्यक्ति जिसने खराब कपड़े पहने हैं और गंदा सा लग रहा है उसकी तरफ ध्यान भी नहीं देता। वास्तव में सोच में वह सभी विधियाँ आती है जिसके द्वारा व्यक्ति को अपने वातावरण के बारे में सूचना मिलती है जैसे देखना, सुनना, महसूस करना, निरीक्षण करना और सूंघना। लोग ऐसा ही करते हैं जैसा वह सोचते हैं और विभिन्न लोग अलग तरह से सोचते हैं। जैसे कि हम वहीं खरीदते हैं जो हमें पसंद है न कि वह जो बेहतरीन है।

3. मनोवृत्ति : मनोवृत्ति मूल्यांकन विवरण होती है। ये ब्यक्ति की लोगों, वस्तुओं या/और घटनाओं के प्रति भावनाओं को अनुकूल या प्रतिकूल रूप से व्यक्त करती है। मनोवृत्ति यह प्रकट करती है कि किसी चीज़ के बारे में व्यक्ति कैसा महसूस करता है। उदाहरण के लिए प्रो.रोबिन्स ने कहा है कि, “मुझे पढ़ाना अच्छा लगता है”, वह अपने कार्य के प्रति अपनी मनोवृत्ति व्यक्त कर रहा है।

संक्षेप में मनोवृत्ति को, किसी वस्तु, व्यक्ति या घटना के प्रति विशेष रूप से महसूस करने और व्यवहार करने की प्रवृत्ति के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। सरल शब्दों में, मनोवृत्ति को व्यक्ति के किसी व्यक्ति, स्थान, वस्तु, स्थिति या विचार के प्रति महसूस करने के ढंग के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। यह किसी वस्तु के प्रति व्यक्ति की भावनाओं, विचारों को वातावरण की किसी वस्तु के प्रति व्यक्त करता है। मनोवृत्ति कई प्रकार से हो सकती है-

(a) दिशा- किसी वस्तु के पक्ष या विपक्ष में,
(b) डिग्री- (i) अनुकूलता, (ii) प्रतिकूलता (iii) मनोवृत्ति में तटस्थ होने का अर्थ वस्तु के प्रति Indifferent होना है।
(c) तीव्रता-आत्म विश्वास डिग्री।

4. मूल्य : मूल्य नैतिकता से भरपूर वह सामान्य विश्वास है, जिसमें व्यक्ति के अच्छे, सही और वांछित विचार शामिल होते हैं। अन्य शब्दों में, क्या सही है या गलत? और क्या अच्छा है या बुरा? प्रश्नों के उत्तर मूल्यों से भरे हैं।

मूल्य वे आधारिक विश्वास हैं जो हमें सही और गलत, अच्छे और बुरे की समझ देते हैं। इस प्रकार, मूल्य नैतिक व्यवहार का आधार बनाते हैं। मनोवृत्ति की तरह ही, व्यक्ति के कई मूल्य हो सकते हैं। हम सभी को मूल्य विधि होती है। मूल्य सीखे जाते हैं और जैसे- जैसे व्यक्ति बढ़ता है और mature होता है, ये परिवर्तित होते हैं।

5. सीखना : यदि हम व्यवहार को समझना, अनुमानित और नियन्त्रित करना चाहते हैं तो हमें यह समझना आवश्यक है कि लोग किस प्रकार सीखते हैं। Learning के बारे में मनोवैज्ञानिकों की परिभाषा आम आदमी की परिभाषा से काफी बड़ी है। साधारण व्यक्ति के विचार में “पढ़ना वह कार्य है जो हम जब हम स्कूल जाते थे तब करते थे।” वास्तव में हम सभी “निरन्तर स्कूल जाते हैं।” Leaming हमेशा की जाती है। अत: learning अधिक यथार्थक परिभाषा है, व्यवहार में कोई भी स्थायी परिवर्तन जो अनुभव के परिणाम स्वरूप होता है।

हम कैसे सीखते हैं? ऊपर दिए चित्र में learning प्रक्रिया को दर्शाया गया है। सबसे पहले learning हमारे वातावरण को अपनाने और समझने में सहायक होती है। परिवर्तित परिस्थितियों के अनुसार अपने व्यवहार को बदल कर हम जिम्मेदार नागरिक और उत्पादक कर्मचारी बनते है।

परन्तु learning Law of Effect’ पर आधारित है, जिसके अनुसार, व्यवहार परिणामों का कार्य है। जिस व्यवहार के अनुकूल परिणाम होते हैं, उसे दुहराया जाता है, जबकि प्रतिकूल परिणामों वाले व्यवहार को दुहराया नहीं जाता।

इसमें परिणाम का अभिप्राय किसी भी उस वस्तु से है जिसे व्यक्ति पुरस्कार समझता है (जैसे धन, तारीफ, पदोन्नति, मुस्कुराहट)। यदि आपका boss आपकी sales approach पर आपको बधाई देता है तो आप इस व्यवहार को दुहराएंगे पर यदि, आपकी sales approach पर आपको डाँटा जाता है तो आप उस व्यवहार को नहीं दुहराएंगे। परन्तु learning प्रक्रिया के मुख्य तत्त्व, हम किस प्रकार सीखते हैं, इसके दो
सिद्धान्त या व्याख्याएं shaping और modelling हैं।

जब learning पूर्व निर्धारित तरीके से की जाती है तो उसे shaped learning कहते हैं। प्रबन्धक कर्मचारियों के व्यवहार को क्रमबद्ध तरीके से पुरस्कारों द्वारा प्रबलन देते हैं, जिससे कर्मचारी वांछित व्यवहार की ओर बढ़ता है। हमारी अधिकतर learning shaping द्वारा होती है। जब हम ये कहते हैं कि हम “गलतियों से सीखते हैं” हमारा अभिप्राय shaping से होता है। हम प्रयास करते हैं, असफल होते हैं और फिर प्रयास करते हैं। इस प्रकार trial and error की series द्वारा हममें से अधिकांश ने साइकल चलाना, मूल गणित समस्याओं को सुलझाना, Class-room Notes लेना और multiple choice tests के उत्तर देना सीखा है।

Shaping के अतिरिक्त, हमने जो सीखा है वह दूसरों को ob-serve करके और फिर उनके व्यवहार की नकल उतार कर सीखा है। जहाँ trial and error learning process धीमा होता है, वहीं modelling द्वारा जटिल व्यावहारिक परिवर्तन काफी जल्दी प्राप्त किए जा सकते हैं।

वातावरणीय तत्त्व

वातावरणीय तत्त्वों में आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक और इनके वैसे अन्य तत्त्व शामिल होते हैं। ये तत्त्व मुख्य तौर पर बाह्य होते हैं और व्यक्तिगत व्यवहार को प्रभावित करते हैं।

आर्थिक तत्त्व : आर्थिक वातावरण व्यक्तिगत व्यवहार का.महत्त्वपूर्ण निर्धारक है। सभी कार्य आर्थिक रूपरेखा में किए जाते हैं,जिनका प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप में संगठन के वातावरण पर प्रभाव पड़ता है।

आर्थिक वातावरण कई तत्त्वों का मित्रण है, जिसमें प्रमुख हैं, रोजगार स्तर, वेतन दर, आर्थिक Outlook और तकनीकी परिवर्तन।

राजनैतिक कारक

व्यक्ति जिस राजनैतिक वातावरण में रहता है, वह उसके व्यवहार को कई तत्त्वों से प्रभावित कर सकता है। सरकार की स्थिरता रोज़गार अवसरों की मात्रा और गुणों को प्रभावित करती है। राजनैतिक अस्थिरता वातावरण में आकर्षित करने की समस्या आती है और रोज़गार के स्थायी स्तर को बनाए रखने में मुश्किलें आती हैं।

कम पूँजी निवेश के कारण भी कार्यों की गुणवत्ता प्रभावित होती है। क्योंकि कम्पनियाँ भी राजनैतिक रूप से अस्थिर देश में निवेश करने से पीछे हटती हैं, इसलिए नौकरियों के लिए प्राप्त धन, कृषि या अन्य labour intensive उद्योगों में लगाया जाता है जिसके परिणामस्वरूप जनसंख्या का बड़ा हिस्सा या तो अस्थायी रोजगार में है या उन कार्यों में है जिससे केवल आधारिक आवश्यकताओं की पूर्ति होती है।

देश की राजनैतिक ideology से निजी व्यवहार प्राथमिक रूप से नागरिकों को प्राप्त स्वतन्त्रता से प्रभावित होता है। उदाहरण के लिए, नियन्त्रित समाज में शिक्षा और Career अवसर कम नियन्त्रित समाज की में व्यक्ति की उम्मीदों के अनुसार कम खुले होते हैं, नियन्त्रित तुलना समाज में प्रबन्ध ढाँचे और फलस्फों का प्रबन्धकों को प्राप्य निर्णयों, कार्यनीतियों और कार्यान्वयन तरीकों पर. विशेष प्रभाव होता है। प्राप्य स्वतन्त्रता का Career choice, job design, अभिप्रेरणा विधि और अंतत: निजी निष्पादन पर प्रभाव पड़ता है।

●  सांस्कृतिक मूल्य-

सांस्कृतिक वातावरण उन संस्थाओं और अन्य ताकतों से बना होता है जो समाज की आधारिक मूल्यों, सोच, कार्य आचारशास्त्र,प्राथमिकता और व्यवहार को प्रभावित करते हैं। लोग एक विशिष्ट समाज में बड़े होते हैं जो उनके मूल विश्वासों, मूल्यों और व्यवहार को आकार देता है। प्रत्येक देश की संस्कृति अलग होती है और इस अन्तर विभिन्न व्यवहार उत्पन्न होते हैं। कार्य नीतिशास्त्र, उपलब्धि की आवश्यकता, प्रयास, पुरस्कार की उम्मीद और मूल्य महत्त्वपूर्ण सांस्कृतिक तत्त्व हैं
जिनके व्यावहारिक निहितार्थ हैं।

संगठनात्मक तत्त्व

निजी विशेषताओं के अलावा, संगठनात्मक तत्त्व भी कार्य पर मानवीय व्यवहार को प्रभावित करते हैं जिनमें प्रमुख सगठनात्मक तत्त्व हैं, शारीरिक सुविधाएं, संगठनात्मक ढाँचा और रचना, नेतृत्व विधियाँ और पुरस्कार प्रणाली।

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