मानव संसाधन

मानव संसाधन की परिभाषा


मानवीय संसाधन प्रबन्ध व्यक्तियों तथा संगठनों को साथ लाने की एक प्रक्रिया है ताकि प्रत्येक के लक्ष्य प्राप्त हो सकें। यह प्रबन्धकीय प्रक्रिया का वह भाग है जिसका सम्बन्ध एक संगठन में मानवीय संसाधनों
के प्रबन्ध से है। यह व्यक्तियों के पूर्ण सहयोग को जीतकर उनसे सर्वश्रेष्ठ को सुरक्षित करने का प्रयत्न करता है। संक्षेप में, इसे एक संगठन के लक्ष्यों को एक प्रभावी तथा कुशल तरीके से प्राप्त करने के लिए योग्य
कार्यशक्ति को प्राप्त करने, विकसित करने तथा बनाए रखने की कला के रूप में परिभाषित किया जा सकता है।


इनवानोविच तथा ग्लूक के अनुसार ‘HRM का सम्बन्ध संगठनात्मक तथा व्यक्तिगत लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए व्यक्तियों के सबसे प्रभावी उपयोग से है’। यह लोगों को कार्य पर प्रबन्धित करने का एक तरीका है,
ताकि वे संगठन को उनका सर्वश्रेष्ठ दे सकें।


एफ.ई.एल. बेच के अनुसार ‘मानवीय संसाधन प्रबन्ध, प्रबन्ध प्रक्रिया का वह हिस्सा है जो प्रमुखत: एक संगठन के मानवीय अवयवों से सम्बन्धित है।


एडीसन के अनुसार ‘मानवीय संसाधन प्रबन्ध मानवीय इंजीनियरिंग का विज्ञान है।


इस तरह से ‘मानव संसाधन प्रबन्ध कर्मचारियों एवं उनके प्रभावी संगठन, निर्देशन, प्रशिक्षण तथा पारिश्रमिक की उचित व्यवस्था है।’

मानव संसाधन प्रबन्ध के लक्षण

इसके निम्न लक्षण हैं-


(अ) सर्वव्यापी शक्ति-HRM प्रकृति में सर्वव्यापी है। यह सभी
संस्थानों में मौजूद रहता है। यह एक संगठन में प्रबन्ध के सभी स्तरों को करता है


(ब) क्रिया अभिमुखी-HRM रिकॉर्ड रखने, लिखित प्रक्रियाओं या नियमों की जगह क्रिया पर ध्यान केन्द्रित करता है। कार्य पर sh कर्मचारियों की समस्याओं को तर्कपूर्ण नीतियों के द्वारा हल किया जाता है।

(स) व्यक्तिगत अभिमुखी-यह कर्मचारियों को उनकी योग्यता को पूर्णतः विकसित करने में सहायता करने का प्रयत्न करता है। यह उन्हें उनका सर्वश्रेष्ठ संगठन को देने के लिए प्रोत्साहित करता है। यह भर्ती, चयन, प्रशिक्षण तथा विकास की एक व्यवस्थित प्रक्रिया के साथ उचित
मजदूरी नीतियों के द्वारा कर्मचारियों को अभिप्रेरित करता है।


(द) व्यक्ति अभिमुखी-|IRM पूर्णत: कार्य पर व्यक्तियों के बारे में
दोनों व्यक्ति के रूप में तथा समूहों के रूप में है। यह व्यक्तियों को दिए
गए जॉब्स पर लगाने का प्रयत्न करता है ताकि अच्छे परिणाम प्राप्त हो
सकें। प्राप्त लाभों का प्रयोग व्यक्तियों को ईनाम देने एवं उत्पादकता में
और सुधार करने हेतु उन्हें अभिप्रेरित करने के लिए किया जाता है।
(य) विकास अभिमुखी-HRM कर्मचारियों की पूरी सामर्थ्य को विकसित
करना चाहता है। इनाम ढाँचे को कर्मचारियों की जरूरतों के अनुसार बनाया
जाता है। उनकी कुशलताओं को तेज तथा विकसित करने हेतु प्रशिक्षण
दिया जाता है। कर्मचारियों को विभिन्न जॉब्स पर rotate किया जाता है
ताकि वे अनुभव एवं अनावरण प्राप्त करें। संगठनात्मक लक्ष्यों की सेवा में
उनकी योग्यताओं का पूर्णत: उपयोग करने का हर प्रयत्न किया जाता है।
(र) वैश्विक अभिमुखी-HRM एक गतिविधि है जो पूरे विश्व में
व्यक्ति प्रबन्ध व्यवहारों द्वारा अपनाई जा रही है (विशेषकर 90 के बाद से)।
संगठनों ने व्यक्तियों के साथ इज्जत एवं संवेदनशीलता द्वारा उचित
व्यवहार करने के महत्त्व को समझ लिया है। अत: जापान में HRM
व्यवहारों को भारतीय अभ्यासकर्ताओं द्वारा यह पता करने के लिए
अवलोकित करना चाहिए कि क्या ऐसे कोई सिद्धान्त हैं जिन्हें सफलतापूर्वक
भारत में लागू किया जा सकता है।
(ल) भविष्य अभिमुखी-प्रभावी HRM संगठन को सक्षम, उचित
अभिप्रेरित कर्मचारियों को उपलब्ध कराकर उसके दीर्घकालीन लक्ष्यों को
प्राप्त करने में सहायता करता है।
(व) एकीकृत यंत्रावली-HRM संगठन में विभिन्न स्तर पर काम
कर रहे लोगों के बीच मैत्रीपूर्ण सम्बन्धों के निर्माण व रखरखाव का प्रयत्न
करता है। संक्षेप में यह मानवीय सम्पत्तियों को एक संगठन की सेवा में
सर्वश्रेष्ठ संभव तरीके से एकीकृत करने का प्रयत्न करता है।
(क) सहायक सेवा-HR विभाग लाइन या कार्यात्मक प्रबन्धकों को
उनके सेविवर्ग कार्य ज्यादा प्रभावशाली ढंग से करने देने में सहायता व
ज्ञान देने के लिए मौजूद होते हैं। मानव संसाधन प्रबन्धक एक विशेषज्ञ ज्ञानकर और सलाहकार
होता है। यह एक स्टाफ कार्य है।
(ख) अंर्तअनुशासनिक कार्य-HRM एक बहुल-अनुशासनात्मक
गतिविधि है जो मनोविज्ञान, समाजशास्त्र, मानव विज्ञान, अर्थशास्त्र
आदि से प्राप्त ज्ञान एवं इनपुट्स का प्रयोग करता है।
(ग) लगातार कार्य : टेरी के अनुसार, HRM लघुकालीन कार्य
नहीं है। इसका अभ्यास हर दिन में सिर्फ एक घंटे या हर हफ्ते में सिर्फ एक
दिन नहीं किया जा सकता। इसे हर दिन के क्रियाकलापों में मानव
होती है।
सम्बन्धों की लगातार सावधानी व जानकारी एवं उनके महत्त्व की जरूरत होगी।
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मानव संसाधन प्रबंधन के उद्देश्य

1. एक योग्य और कार्यकुशल कार्य बल को गठित कर एक संस्थान के अपेक्षित उद्देश्यों की पूर्ति के लिए उसका उपयोग करना।

2. संस्थान में कार्यरत सभी सदस्यों के लिए एक मजबूत संगठन तंत्र स्थापित करना जिसमें सदस्यों के माध्यम अपेक्षित कार्य संबंध बने रहें।

4. संस्थान की प्रगति के साथ-साथ प्रत्येक कर्मचारी व कर्मचारी के लिए भी प्रगति की सुविधा व अवसर निर्मित करना।

3. संस्थान के अपने उद्देश्यों तथा प्रत्येक कर्मचारी व कर्मचारी समूह के अपने उद्देश्यों की पूर्ति में एक सामंजस्य बनाये रखना।

5. संस्थान के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु मानव संसाधन का प्रभावी रूप से उपयोग करना।


6. प्रत्येक कर्मचारी और कर्मचारी समूह की आवश्यकता की पहचान कर उनको उचित तथा समान वेतन व अन्य लाभ देना।

7. कर्मचारी हित, उनकी सामाजिक सुरक्षा चुनौती पूर्ण कार्यों में उनकी सहायता, मान, सम्मान और सुरक्षा की जिम्मेदारी वहन करना।


8. उच्च नैतिक मूल्य तथा अच्छे मानव संबंध कर्मचारियों में बनाये रखने के लिए बेहतर कार्य दशा बनाये रखना एवं आवश्यकतानुसार उसमें सुधार करना।

9. मानव-संपदा को निरंतर प्रशिक्षण एवं विकास कार्यक्रमों के माध्यम से मजबूत बनाये रखना।

10. सामाजिक बुराइयों जैसे बेरोजगारी, अर्धरोजगारी, आय तथा धन के असमान वितरण को न्यूनतम करने पर विचार तथा योगदान देना तथा महिलाओं को रोजगार के अवसर देकर और पद दलित सामाजिक वर्ग को अवसर आदि पर विचार कर समाज के कल्याण को सुधारना।

11. संस्थान के प्रबंधन अभिव्यक्ति एवं विचारों की स्वतंत्रता।

12.संस्थान में प्रभावी, स्वीकार्य एवं न्यायिक नेतृत्व देना।

13.रोजगार को स्थायित्व देने हेतु कार्य करने की अच्छी सुविधायें तथा पर्यावरण उपलब्ध कराना।

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