मार्केटिंग प्रबन्ध प्रक्रिया


विपणन प्रबंध ग्राहक की जरूरतों व आवश्यकताओं की पहचान तथा फिर लाभ के साथ ग्राहक की जरूरतों को संतुष्ट करने के लिए एक विपणन कार्यक्रम विकसित करने की एक प्रक्रिया है। अतः प्रभावी विपणन उपभोक्ताओं के एक समूह तथा उनकी जरूरत के ढाँचे की पहचान के साथ प्रारंभ होता है। एक विपणनकर्ता को बाह्य पर्यावरण को विश्लेषित व छानबीन करके व वर्तमान बाजार माँग को अनुमान लगाने व भावी संभावना का पूर्वानुमान करने हेतु बाजार संबंधित सूचना को एकत्रित करके विपणन अवसरों की पहचान करने की जरूरत होती है। विपणन प्रबंधक ग्राहकों के एक सजातीय समूह की पहचान करने जिनके नियोजित विपणन कार्यक्रम के प्रति ज्यादा सकारात्मक रूप से प्रत्युत्तर देने की संभावना है के लिए बाजार को खंडीकृत करता है। विपणन प्रबंधक व्यवसाय में प्रतियोगी बांडों की स्थितियों का मूल्यांकन करता है तथा एक अनुकूल व विशिष्ट स्थिति को तय करता है जो प्रतियोगियों से इसके प्रस्ताव को विभेदित करेगी। विपणन रणनीतियाँ विकसित करते समय, उसे उपभोक्ता निर्णयन प्रक्रिया तथा प्रतियोगिता से डील करने के लिए इस प्रक्रिया को कौनसे कारक प्रभावित करेंगे, यह समझना चाहिए।

लक्षित खंडों की पहचान तथा चयन एवं स्थितिकरण रणनीति विपणनकर्ता को बाजार के लिए एक नया उत्पाद या सेवा प्रस्ताव विकसित करने में सहायता करते हैं। वह उत्पाद या सेवा को विकसित करता है, इसे एक ब्रांड नाम देता है तथा नए प्रस्ताव के लिए एक मूल्य निर्धारण रणनीति तय करता है। मूल्य निर्धारण रणनीति उत्पाद या सेवा के संपूर्ण जीवन के लिए तय की जाती है न कि सिर्फ प्रस्ताव की परिचयात्मक अवधि के लिए। वह प्रतियोगी की प्रति मूल्य निर्धारण रणनीति से निबटने में मूल्य निर्धारण परिवर्तनों से निबटने के बारे में भी एक रणनीति विकसित करता है। वह मध्यस्थों को स्थापित करता है तथा बाजार तक प्रस्ताव ले जाने के लिए विक्रयकर्ताओं की भर्ती करता है। मूल्य नेटवर्क का डिजाइन तथा चयन उत्पाद को बाजार के विभिन्न भागों तक वितरण करने में सहायता करता है। विपणन प्रबंधक ज्यादा उच्च उपभोग तथा ब्रांड छवि के लिए बाजार में उत्पाद या सेवा को संवर्धित करने के लिए विज्ञापन, विक्रय संवर्धन, लोक संबंध व प्रत्यक्ष विपणन जैसे औजारों के एक मिश्रण के द्वारा एकीकृत विपणन संचार रणनीति को नियोजित करता है। विपणन प्रबंधक प्रभावी समन्वय तथा नियंत्रण के द्वारा विपणन कार्यक्रम के सभी तत्त्वों जैसे उत्पाद मूल्य, मूल्य नेटवर्क, विक्रय शक्ति तथा एकीकृत विपणन संचार औजारों को मिश्रित करता है।

संक्षेप में, विपणन प्रबंध प्रक्रिया में चार प्रमुख चरण शामिल होते है अर्थात् बाजार विश्लेषण, बाजार नियोजन, विपणन कार्यक्रम का क्रियान्वयन तथा कुल विपणन प्रयत्नों का नियंत्रण। बाजार विश्लेषण वर्तमान बाजार हिस्सा, बाजार शक्ति के रूप में कंपनी की वर्तमान स्थिति को पता करने, प्रतियोगिता तथा बाजार अवसर के सामने कंपनी की संबंधित शक्तियाँ तथा कमजोरियाँ पता करने तथा विपणन पर्यावरण में इसके द्वारा सामना की जाने वाली संभावित चुनौतियों का पता करने के चारों तरफ घूमता है। विपणनकर्ता अवसर की पहचान के लिए विपणन पर्यावरण की छानबीन करने हेतु स्वोट विश्लेषण, सीनेरिया निर्माण, पार
प्रभाव विश्लेषण तथा अन्य पर्यावरणीय विश्लेषण तकनीकों जैसी विभिन्न विधियों का प्रयोग करता है। बाजार के लिए नियोजन करते समय उसे निम्न को तय करना पड़ता है-लक्षित करने के लिए खंड, कंपनी का व्यावसायिक ध्येय, इसके द्वारा सेवा किए जाने वाले ग्राहक बाजारों की श्रेणी, चाहे गए मार्केटिंग अंतिम सेवा को प्राप्त करने के लिए मुख्य नीति का प्रकार। इस कारण से विपणन नियोजन में सबसे पहले कार्यों में से एक विजातीय बाजार को अपेक्षाकृत सजातीय खंडों में विभाजित करना है।एक बार एक विशिष्ट ग्राहक समूह की पहचान व विश्लेषण हो जाने पर, तब विपणन प्रबंधक पहचाने गए ग्राहकों की जरूरतों को लाभदायक तरीके से संतुष्ट करने के लिए कंपनी के संसाधनों व गतिविधियों को आबंटित कर सकता है।

विपणनकर्ता निम्न तरह के प्रश्नों के उत्तर पाने का प्रयत्न करता हे-

1.कंपनी के ग्राहकों (संभावित ग्राहकों) की कौनसी समस्याएं हैं जिन्हें ऑफरिंग (उत्पाद या सेवाएं) अन्य विपणनकर्ताओं के से बेहतर हल कर सकते हैं?

2.इस उपभोग समस्या वाले ग्राहक का प्रोफाइल क्या है?

3.विशिष्ट चरण तथा परिस्थितियाँ (वास्तविक/संभावित) क्या है जिन्हें एक कंपनी के विपणन प्रस्ताव में (उत्पाद, मूल्य, वितरण या संवर्धन) परिवर्तनों की जरूरत है।

विपणन प्रबंधक उत्पाद निर्माता की जगह एक हल प्रदाता की भूमिका ग्रहण कर लेता है। बाजार विश्लेषण विपणनकर्ता को वर्तमान उत्पादों व नए उत्पादों के लिए नए बाजारों की पहचान करने, वर्तमान ग्राहकों के लिए नए उत्पाद नवप्रवर्तन करने व भविष्य के लिए संभावित उत्पाद प्रस्तावों की खोज करने में सहायता करता है।

विपणन योजना तब तक प्रभावी नहीं होती जब तक कि इसे क्रियान्वित नहीं किया जाता। एक उचित क्रियान्वयन कार्यक्रम के बिना विपणन नियोजन अभ्यास सिर्फ कागजी कार्य रह जाता है। विपणन क्रियान्वयन में नियोजन रणनीति का क्रियान्वयन तथा विपणन लक्ष्य प्राप्त करने के लिए दुर्लभ संसाधनों का आबंटन शामिल होता है। विपणन प्रबंधक विपणन रणनीति को इसे बहुत सी परिचालनात्मक योजनाओं तथा लघुकालीन कार्यक्रमों में रूपांतरित करके क्रियान्वित करता है, जिनके समयबद्ध परिणाम मापे जा सकते हैं। विपणन नियंत्रण तय लक्ष्यों के साथ विस्तारित प्रयत्न व संसाधनों को मापने की एक प्रक्रिया है। प्राप्तियों को तय उद्देश्यों के साथ कमियाँ यदि कोई हों को पता करने हेतु मूल्यांकित किया जाता है तथा भविष्य के लिए संभावित कार्यवाही योजनाएं डिजाइन करने हेतु ताकि विस्तारित संसाधनों की प्रभावशीलता तथा लाभ का प्रवाह बढ़े।

हर संगठन का एक ढाँचा तथा संस्कृति होती है जो संतुष्टि के एक निरंतर स्तर को उपलब्ध कराकर ग्राहकों की हमेशा बदलती जरूरतों से निबटने हेतु इसकी तैयारी व प्रभावशीलता को प्रदर्शित करते है। संगठन में एक विशिष्ट विभागीय ढाँचे तक सीमित विपणन कार्य शायद ही कभी सफलता लाता है। यह संगठन में कार्यात्मक अक्षमता के कारण बहुत भ्रम निर्मित करता है। इस संदर्भ में पूरे संगठन को ज्यादा बेहतर सफलता के लिए बाजार अभिमुखीकरण की तीव्रता को समझना होगा संगठनात्मक ढाँचे की अवधारणा दो मुद्दों के चारों तरफ घूमती है। प्रथम संगठन के भीतर विपणन विभाग का संगत महत्त्व है तथा दूसरा मूल्य श्रृंखला में अन्य कार्यात्मक विभागों तथा बाहरी खिलाड़ियों के साथ इसके संबंध हैं।

एक विपणन प्रबंधक को एक सफल विपणन कार्यक्रम विकसित करने के लिए विभिन्न निर्णय लेने होते हैं। विपणन निर्णय पर्यावरण के बारे में कुछ मान्यताओं के अंतर्गत लिए जाते हैं। कई बार जब ये मान्यताएं गलत निकलती हैं, तब विपणन कार्यक्रम असफल हो जाते है। पर्यावरणीय कारक संगठन के लिए बाहरी तथा विपणन प्रबंधक के नियंत्रण के परे है। उसे वर्तमान पर्यावरण का ध्यान रखना होता है तथा विपणन सफलता के लिए अवसर विकसित करने तथा चुनौतियों से बचने हेतु जोखिम उठाने होते हैं। बाहरी विश्व में प्रवृत्तियों के बारे में विशिष्ट मान्यताओं के अंतर्गत वह उत्पाद या सेवा प्रस्ताव के बारे में,प्रस्ताव के लिए प्रस्ताविक मूल्य निर्धारण, वितरण श्रृंखला की लंबाई तथा प्रकार एवं एकीकृत विपणन संचार के औजारों के बारे में निर्णय लेता है।

ये कारक विपणन मिश्रण तत्त्व कहलाते हैं। मान्यताएं या पर्यावरणीय दशाएं जिनके आधार पर विपणन निर्णय लिए जाते हैं वे विपणन प्रबंधक के नियंत्रण के परे है तथा अनियंत्रणनीय कारक कहलाते हैं। तात्कालिक पर्यावरण के तत्त्व जो व्यवसाय को सीधे प्रभावित करते हैं उन्हें व्यष्टि- पर्यावरणीय कारक कहा जाता है जबकि ज्यादा विस्तृत बाह्य कारक समष्टि-पर्यावरणीय शक्तियाँ कहलाती हैं। विपणन मित्रण अनियंत्रणनीय कारकों का एक समूह है जिसे विपणन प्रबंधक चाहे गए परिणामों को प्राप्त करने के लिए एक विपणन कार्यक्रम को डिजाइन करने में प्रयोग करता है।

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