मार्केटिंग मिश्रण के परिवर्तन और प्रकार

विपणन मिश्रण में परिवर्तन

समय तथा परिस्थितियों (दशाओं) के अनुसार, विपणन मिश्रण में परिवर्तन करने होते हैं। उपभोक्ताओं द्वारा मांगों, उनकी पसंद तथा चाहतों, फैशनों, परंपराओं तथा परिपाटियों आदि में दिन प्रतिदिन विभिन्न परिवर्तन होते हैं। साथ ही ग्राहकों की जरूरतें तथा माँगें, उनकी क्रय शक्ति, जीविका का स्तर, शिक्षा तथा सामाजिक एवं आर्थिक नीतियाँ बदलती रहती हैं तथा समय-समय पर भिन्न होती हैं। ऐसे विचलनों कारण, विपणन मिश्रण में भी कुछ परिवर्तन करना जरूरी होता है। एक
उत्पादक के लिए, ग्राहकों की निरन्तरता को बनाए रखने के लिए, विपणन मिश्रण में परिवर्तन करना जरूरी होता है। विपणन मिश्रण में उत्पाद के मूल्य, पेकिंग, ब्रांड, रंग, प्रारूप, आकार, डिजाइन तथा गुणों या विशेषताओं के अनुसार परिवर्तन समामेलित किए जा सकते हैं।

विपणन मिश्रण को प्रभावित करने वाले कारक विपणन मिश्रण को प्रभावित करने वाले कारकों को निम्न दो श्रेणियों में बाँटा जा सकता है;-

(1) बाजार कारक : ये वे कारक हैं जिनके ऊपर एक कंपनी का कोई नियंत्रण नहीं होता जब वे कपनी की विपणन गतिविधियों को प्रभावित करते हैं। ऐसे कारक है.

(1) उपभोक्ता व्यवहार : उपभोक्ता व्यवहार में उपभोक्ताओं को चाहत तथा प्राथमिकता शामिल होते हैं। यह उत्पादों की मांग प्रभावित करता है। क्योंकि चाहत तथा प्राथमिकता आय फैशन सामाजिक प्रास्थिति आदि में परिवर्तन द्वारा प्रभावित होते है, अतः विपणन प्रबंधक को, विपणन मिश्रण को तैयार करते समय, इन कारको का अध्ययन करना चाहिए।

(2) प्रतियोगिता : विपणन प्रबंधक को प्रतियोगिता के आधारो, उपभोक्ताओं की तरफ प्रतियोगियों के दृष्टिकोण, प्रतियोगी उत्पादों के गुण तथा विशेषताओं तथा उनकी विपणन रणनीतियों को ध्यान में रखना चाहिए।

(3) वितरण प्रणाली की प्रवृत्ति : विपणन प्रबन्धक को विपणन मिश्रण को निर्मित करते समय, वितरण प्रणाली के विभिन्न प्रारूपों तथा वितरकों की प्रकृति तथा व्यवहार पर विचार करना चाहिए। उसे उत्पाद की प्रकृति तथा विशेषताओं पर विचार करके, इस संबंध में निर्णय लेने के बारे में बहुत सावधान रहना चाहिए।

(4) सरकारी नियंत्रण : एक विपणन प्रबंधक को विपणन मिश्रण को निर्मित करने में कंपनी के उत्पादों के संबंध में विपणन गतिविधियों पर विभिन्न सरकारी नियंत्रणों के बारे में विचार करना चाहिए।

2. विपणन कारक : ये वे कारक हैं जिनके ऊपर एक कंपनी का उन्हें बाजार की जरूरतों के अनुसार फिट बनाने के लिए पूरा नियंत्रण होता है। ऐसे कारक है:

(1) उत्पाद नियोजन : कंपनी के उत्पाद को ग्राहकों की जरूरतों को संतुष्ट करना चाहिए। अत: उत्पाद गुणवत्ता को ग्राहकों की जरूरतों को सूट करने के लिए नियोजित किया जाना चाहिए।

(2) ब्रांड नीति : ब्रांड नीति में ट्रेड मार्को तथा ब्रांड नाम के संबंध में निर्णय शामिल होते हैं। यह कंपनी के उत्पाद की विक्रय मात्रा को प्रभावित करती है। विपणन प्रबंधक कंपनी के विभिन्न उत्पादों के लिए एक ब्रांड नाम या समान उत्पाद की विभिन्न गुणवत्ताओं के लिए विभिन्न ब्रांड नामों को तय कर सकता है।

(3) पैकेजिंग नीति : पैकिंग के आकार तथा गुणवत्ता एवं गेटअप पर बहुत सावधानीपूर्वक विचार किया जाना चाहिए। ग्राहक प्रायः उत्पाद को सिर्फ इसकी आकर्षक पैकिंग के कारण प्राथमिकता देते हैं। यह सुधरी उत्पाद छवि के कारण माँग को बढ़ाकर कंपनी के कुल लाभों को सुधार देता है।

(4) वितरण श्रृंखलाएं : विपणन प्रबंधक को उत्पाद की प्रकृति,वितरकों को प्रकृति, उनकी जरूरतों, उत्पाद के प्रति उनकी मनोवृत्ति तथा उनके मनोबल पर विचार करके वितरण की उचित श्रृंखला के बारे में निर्णय लेना चाहिए। वह सभी उत्पादों के लिए एक प्रकार की वितरण श्रृंखला या विभिन्न उत्पादों के लिए विभिन्न श्रृंखलाओं को अपना सकता है।

(5) व्यक्तिगत विक्रय : व्यक्तिगत विक्रय वह कुशलता है कि एक विक्रयकर्ता बिक्री पाने के लिए ग्राहकों की जरूरतों को कंपनी के उत्पादों से मेल करता है। विपणन प्रबंधक को तय करना चाहिए कि क्या बिक्री को व्यक्तिगत विक्रय के द्वारा संवर्धित करना है। इसमें विक्रयकर्ताओं की भर्ती, प्रशिक्षण तथा संगठन से संबंधित निर्णय शामिल होते हैं।

(6) विज्ञापन नीति : विज्ञापन नीति में विज्ञापन व्यय को अनुमानित करने के निर्णय तथा इसका नियंत्रण शामिल होता है। विपणन प्रबंधक को विज्ञापन के प्रयोजनों, क्षेत्र, मीडिया तथा विज्ञापन कॉपी आदि पर विचार करके विज्ञापन नीति को निर्मित करना होता है।

(7) विशेष विक्रय संवर्धन नीति : सामान्य विज्ञापन नीति के अलावा, प्रबंधक को विशेष विक्रय संवर्धन नीति को भी उपलब्ध कराना चाहिए।

(8) भौतिक वितरण : विपणन प्रबंधक को यातायात भंडारण तथा वित्त प्रबंध सहित वस्तुओं के भौतिक वितरण की नीति को तय करना चाहिए ताकि उत्पाद को ग्राहकों को वितरण की न्यूनतम लागत के साथ उचित समय तथा स्थान पर उपलब्ध कराया जा सके।

(9) बाजार शोध : बाजार शोध विपणन की आत्मा है। विपणन प्रबन्धक को विपणन मिश्रण को तैयार करने में बाजार शोध से प्राप्त सूचना का प्रयोग करना चाहिए।

हालांकि उपरोक्त कारक आदर्श विपणन मिश्रण को निर्मित करने में सहायता करते हैं लेकिन व्यवहार में विपणन प्राधिकारियों का अनुभव, ज्ञान तथा दूरदर्शिता इन विश्लेषणात्मक तथा तकनीकी कारकों की तुलना में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं।

मार्केटिंग मिश्रण के प्रकार :-

विपणन नियोजन में हम स्थिति का आंकलन करने के लिए विपणन सूचना का प्रयोग करते हैं। हमें बाजार खंडों के प्रारूप में विशिष्ट विपणन लक्ष्यों को चुनना होता है। बाजार के हर खंड या उपविभाजन के लिए हम बहुत से उपकरणों या विपणन गतिविधियों के प्रकारों के एक मिश्रण को निर्मित करते हैं जिन्हें एक विशिष्ट लक्षित या बाजार खंड तक पहुँचने के लिए एक सिंगल विपणन प्रोग्राम में एकीकृत किया जाता है।
इन विपणन विधियों या उपकरणों का मिश्रण विपणन मिश्रण के रूप में जाना जाता है।

एक सफल विपणन रणनीति में एक विपणन मिश्रण के साथ एक लक्षित बाजार होना चाहिए जिसके लिए विपणन मिश्रण निर्मित किया जाता है। अवयव या चर जो विपणन मिश्रण को बनाते हैं वे सिर्फ चार होते हैं:
(1) उत्पाद या सेवा पर निर्णय,
(2) मूल्य पर निर्णय,
(3) संवर्धन पर निर्णय तथा
(4) वितरण पर निर्णय।

ये चार संघटक नजदीकी से अंतर्संबंधित होते हैं। सिस्टम दृष्टिकोण के अंतर्गत एक क्षेत्र में निर्णय दूसरों में कार्यवाही को प्रभावित करता है। विपणन मित्रण निर्णय विपणन प्रबंध के एक बड़े भाग को संघटित करता है।

विपणन प्रबंधक सभी विपणन संघटकों का मिश्रक होता है तथा वह सभी विपणन अवयवों तथा संसाधनों का एक मिश्रण (ब्लेडिंग या मिश्रण) निर्मित करता है। विपणन मिश्रण सभी विपणन संघटकों के एक आदर्शतम (न्यूनतम लागत) मिश्रण को प्रस्तावित करता है ताकि हम कंपनी के लक्ष्यों को प्राप्त कर सकें जैसे लाभ, निवेश पर प्रत्याय, बिक्री की मात्रा, बाजार हिस्सा आदि। यह हमारे विपणन परिचालनों का एक लाभदायक फार्मूला होता है। विपणन मित्रण निश्चित ही बदलती विपणन दशाओं तथा हर बाजार को प्रभावित करने वाले बदलते पर्यावरणीय कारकों (तकनीकी, सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक) के अनुसार बदलेगा। यह निश्चित ही विपणन शोध तथा विपणन सूचना पर आधारित होता है। इसे पूरी तरह ग्राहक मॉग, प्रतियोगिता के साथ अन्य ऊपर उल्लिखित पर्यावरणीय शक्तियों से संबंधित होना चाहिए। सबसे सरल तरीके से, मूलभूत विपणन मिश्रण चार इनपुटों या उपमिश्रणों का मिलाना है जो विपणन प्रणाली का केन्द्र निर्मित करते हैं:

(1) उत्पाद मिश्रण : उत्पाद उपयोगिता समाहित करने वाली
चीज है। इसके चार अवयव होते हैं : (1) उत्पाद रेज, (2) बिक्री बाद
सेवा, (3) ब्रांड तथा (4) पैकेज। उत्पाद प्रबंध विपणन प्रबंधक के साथ
सलाह करके उत्पाद मिश्रण को विकसित करता है।

(2) मूल्य मिश्रण : मूल्य प्रस्तावक द्वारा उत्पाद पर लगाया मूल्यांकन है। इसे मूल्य निर्धारण, अपहारों, अलाउंसों तथा साख की शर्तों को कवर करना होता है। यह मूल्य प्रतियोगिता से डील करता है।

(3) स्थान (वितरण) मिश्रण : वितरण उत्पाद की सुपुर्दगी तथा इसे उपभोग करने का अधिकार है। इसमें शामिल हैं वितरण की श्रृंखलाएं, यातायात, भंडारण तथा स्कंध नियंत्रण।

(4) संवर्धन मिश्रण : संवर्धन उत्पाद के बारे में प्रस्तावक द्वारा संभावित को प्रेरक संचार है। इसमें कवर होते हैं विज्ञापन, व्यक्तिंगत विक्रय, विक्रय संवर्धन, प्रचार, लोक संबंध, प्रदर्शनी तथा संवर्धन में प्रयुक्त प्रदर्शन। मोटे तौर पर यह गैर-मूल्य प्रतियोगिता से डील करता है।

कुछ विपणन विशेषज्ञ विपणन मिश्रण के फॉर्मूले में सात संघटकोंको इंगित करते हैं। अतिरिक्त तीन संधारक हैं : (1) पैकेजिंग, (2)अवबोध तथा (3) परसिस्टेंस-कुल मिलाकर विपणन फॉर्मूले के सभी 7P’s। प्लास्टिक पैकेज ने स्व-सेवा रीटेलिंग में नया महत्त्व पाया है।अवबोध छुपे विपणन अवसर को पता करने व पकड़ना संभव करने कीअंतर्दृष्टि का गुण है जैसे प्रोमिस टूथपेस्ट में लोंग का ‘हुक’, चाय केबैग्स, कास्मेटिक्स में आयुर्वेदिक संघटक। परसिस्टेंस सभी परेशानियों के विरुद्ध व्यक्ति की शक्तिशाली इच्छा को प्रदर्शित करने की जरूरी मनोवृत्तिहै। पूरे विपणन दल को परसिस्टेंस को प्रदर्शित करने के लिए स्व-अभिप्रेरित दल होना चाहिए। अत: अवबोध तथा परसिस्टेंस के बिना,एक नए उत्पाद का विपणन मिश्रण सिर्फ एक असफलता हो सकता है।

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