व्यक्तिगत व्यवहार आदान प्रदान

एक इनपुट आउटपुट प्रणाली के रूप में व्यवहार

मानव व्यवहार व्यक्ति तथा इस पर्यावरण का फलन है, ‘व्यक्ति’ प्रमुखत: सामान्य जैविकीय लक्षणों द्वारा आकारित होता है तथा पर्यावरण जो बाह्य स्फूर्ति को निर्मित करता है। इसमें मानव व्यवहार की यादृच्छिकता की संभावना शामिल नहीं होती है तथा यह मानता है कि सभी मानव व्यवहार लक्ष्य निर्देशित है ताकि लक्ष्यों तथा व्यवहार के बीच में एक मापनीय सहसंबंध उपस्थित होता है। बाह्य स्फूर्ति सबसे महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह आंतरिक प्रक्रियाओं को क्रियाशील करती है तथा व्यवहार होता है अत: व्यवहारात्मक प्रतिक्रियाओं को होने देने हेतु एक बाह्य इनपुट जरूरी है।

मूलभूत आगत-निर्गत मॉडल को S70→B मॉडल के रूप वर्णित किया जा सकता है जहाँ S इनपुट के रूप में बाह्य पर्यावरण द्वारा निर्मित स्फूर्ति को प्रदर्शित करता है, 0 मानव अवयवों के लिए है जो शारीरिक के साथ मनोवैज्ञानिक प्रक्रियाओं द्वारा क्रियाशील होता है तथा B आउटपुट के साथ व्यवहार को प्रदर्शित करता है, प्रेरक तथा अवयव के बीच में आपसी अंतक्रिया है तथा रिफलेक्स क्रियाओं को छोड़कर, अवयव तय करता है कि किस तरह का व्यवहार आउटकम हो।इस अंतक्रिया का परिणाम अवबोध होता है तथा यह मानव व्यवहार का कारक बन जाता है।

एक अन्य आगत-निर्गत मॉडल कोलासा द्वारा प्रस्तावित किया।गया है जो मानव व्यवहार को प्रणाली मॉडल के संदर्भो में वर्णित करता है जो प्रक्रिया को एक ज्यादा वस्तुनिष्ठ तरीके से वर्णित कर सकती है। बाह्य पर्यावरण से इनपुट को एक केन्द्रीय प्रोसेसिंग कार्य के द्वारा प्रोसेस व विश्लेषित किया जाता है जो पिछले मॉडल में मानव अवयव ‘0’ के समान है, सिर्फ इस बात को छोड़कर कि यह केन्द्रीय प्रोसेसिंग क्षेत्र अवबोध तथा ऐसी केन्द्रीय प्रक्रियाओं जैसे सोचना, सोचना, विचार करना, तर्क, समस्या समाधान तथा निर्णयन सहित cognition का महत्त्वपूर्ण भाग है।

यहाँ प्रेरक इनपुट को बनाता है तथा विभिन्न संवेदनशील अंगों द्वारा सूचना में परिवर्तित होता है। यह सूचना केन्द्रीय सूचना प्रोसेसिंग फलन द्वारा ऐसे तरीके में संगठित की जाती है जो व्यक्ति के लिए अर्थपूर्ण है। यह संगठन अवबोधात्मक प्रक्रियाओं के द्वारा बनता है जो सामाजिक सेटिंग में अनुभव के द्वारा निर्मित होती है तथा जहाँ तक मूल्यों तथा सूचना की उपयोगिता का संबंध है वह व्यक्तित्व गुणों का फलन है। व्यवहारात्मक क्रम में दूसरा कदम सूचना का विश्लेषण, सूचना से व्यवहार करने में विकल्पों का चुनाव तथा तब व्यक्ति के लिए सबसे लाभदायक विकल्प चुनना व कार्यवाही करना है। इस कदम को निर्णयन तथा क्रिया करना कहा जाता है तथा प्रणाली का आउटपुट बन जाता है तथा यह आउटपुट व्यक्ति के व्यवहार को प्रदर्शित करता है।

व्यवहार तथा निष्पादन

स्करमेहारन, हंट तथा आसबोर्न के अनुसार निष्पादन 3 लक्षणों का प्रदर्शन है। ये हैं-

●निष्पादन करने की व्यक्ति की ‘योग्यता’
●निष्पादन करने की व्यक्ति की तत्परता
●संगठनात्मक सहयोग

जहाँ संगठनात्मक सहयोग मूलतः एक व्यक्ति को निष्पादन करने का एक अवसर उपलब्ध कराता है जो कुछ मात्रा तक व्यवहार को प्रभावित करता है, ‘योग्यता’ तथा ‘तत्परता’ मानव व्यवहार से सीधे संबंधित है।

निष्पादन करने की योग्यता ऐसे क्षमता लक्षणों जैसे एबिलिटी तथा एप्टीट्यूट का परिणाम है जिन्हें व्यवहार का उत्तराधिकार लक्षण माना जा सकता है। एबिलिटी जो अंशतः बुद्धि का माप है, वह प्रभावी निष्पादन के लिए मूलभूत तथा महत्त्वपूर्ण तत्त्व है तथा सभी अभिप्रेरणा तथा संगठनात्मक प्रयत्न निष्पादन की तरफ किसी सहायता के नहीं होंगे यदि मूलभूत योग्यता उपस्थित नहीं होगी। इसके अनुसार जॉब निष्पादन सुविधाजनक हो जाता है जब योग्यता जरूरतों से मेल खाती है।

जब योग्यता कार्य जरूरतों में फिट होती है, तब भी इसका परिणाम अनिवार्यतः उच्च निष्पादन में नहीं होता। निष्पादन के उच्च स्तरों को प्राप्त करने के लिए व्यक्तियों को निष्पादन की तत्परता दिखानी चाहिए व पर्याप्त कार्य प्रयत्न करना चाहिए। निष्पादन की तत्परता का प्रयत्न या मात्रा प्रभावी रूप से व्यक्ति की अभिप्रेरणा की मात्रा पर निर्भर होगा। यह अभिप्रेरणा जो एक व्यवहारात्मक अवधारणा है, वह व्यक्ति के भीतर शक्तियों को परिभाषित करती है जो एक दिए कार्य से संबंधित दिशा तथा प्रयत्न के स्तर हेतु जिम्मेदार होती है। उदाहरण के लिए एक कक्षागत सेटिंग में, सब विद्यार्थी प्रायः एक समान पृष्ठभूमि, समान आयु तथा समान क्षमताओं से आते हैं तथा समान निर्देशक व समान अध्ययन जरूरतों का सामना करते हैं परन्तु सभी विद्यार्थी समान श्रेणियाँ प्राप्त नहीं करेंगे क्योंकि कुछ विद्यार्थी दूसरों की तुलना में ज्यादा कठोर कार्य करने के लिए उच्च रूप से अभिप्रेरित होंगे।

संगठनात्मक सहयोग तथा संसाधन मानव व्यवहार को एक महत्त्वपूर्ण तरीके से प्रभावित करते हैं तथा निष्पादन इस व्यवहार से प्रभावित होता है। संगठनात्मक ढाँचे में भौतिक सुविधाएं तथा तकनीक के साथ नेताओं से सलाह तथा निर्देशन कार्य के प्रति सकारात्मक रवैये के प्रति बहुत अनुकूल होते हैं जिसका परिणाम उच्च गुणवत्ता का निष्पादन होता है। अपर्याप्त सहायता प्रणालियाँ जैसे rush जॉब्स, अस्पष्ट निर्देशन व निर्देशों के साथ कार्य निष्पादित करने के लिए सर्वश्रेष्ठ औजारों की अनुपलब्धता, ये सभी व्यवहार तथा निष्पादन पर नकारात्मक प्रभाव हैं। अपर्याप्त संगठनात्मक सहयोग के कुछ लक्षणनीचे दिए गए हैं-

●समय की कमी
●अपर्याप्त बजट
●अपर्याप्त औजार, उपकरण, आपूर्तियाँ
●अस्पष्ट निर्देश तथा जॉब से संबंधित सूचना
●अनुमानित निष्पादन के अनुचित स्तर
●जॉब संबंधित प्राधिकार की कमी
●चाही गई सेवाओं तथा दूसरों से सहायता की कमी
●प्रक्रियाओं की अलोचशीलता
●उपरोक्त सभी बाधाएं कार्य निष्पादन को बाधित करती हैं।

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