संविदा का अर्थ

संविदा का अर्थ

सर विलियम एन्सन के अनुसार एक संविदा कानून द्वारा
प्रवर्तनीय दो या ज्यादा व्यक्तियों के बीच किया गया ऐसा ठहराव है जिसके द्वारा एक या ज्यादा पक्षकारों द्वारा दूसरे या दूसरों के लिए कार्य करने या बचने के अधिकार प्राप्त कर लिए जाते हैं।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 2(h) के अनुसार ‘कानून’ द्वारा प्रवर्तनीय एक ठहराव एक संविदा है।
इस परिभाषा में दो विशिष्ट बिन्दु हैं-


(1) एक ठहराव होना चाहिए, और

(ii) ऐसा ठहराव कानून के सहायता से प्रवर्तनीय होना चाहिए।

संविदा = ठहराव + कानून द्वारा प्रवर्तनीयता

सभी अनुबंध ठहराव होते हैं, पर सभी ठहराव अनुबंध नहीं होते हैं :-

यदि ‘ठहराव’ तथा ‘अनुबंध’ का अलग से अध्ययन किया जाता है, तब यह जाना जा सकता है कि ‘ठहराव’ का क्षेत्र ‘संविदा से ज्यादा विस्तारित है।

(I) सभी संविदाएं ठहराव होती हैं


(1) कानून के न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय : यदि संविदा का।आदर नहीं किया जाता है, तब इसे कानून के न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय कराया जा सकता है। एक संविदा सिर्फ तब वैध होती है जब: जब पक्षकारों के बीच में एक प्रस्ताव तथा इसकी स्वीकृति के
द्वारा एक ठहराव होता है।

(ii)ठहराव सिर्फ उन व्यक्तियों द्वारा किया जाना होता है जो एक संविदा में प्रवेश करने के लिए सक्षम तथा योग्य होते हैं।

(iii)उनकी स्वीकृति स्वतंत्र रूप से प्राप्त की गई है।

(iv)इसके लिए उचित या औचित्यपूर्ण प्रतिफल का भुगतान किया गया है।

(v) ठहराव व्यर्थ घोषित नहीं किया गया है तथा

(vi)ठहराव लिखित तथा पंजीयत होना चाहिए।

यदि किसी संविदा में, उपरोक्त बिन्दुओं का ध्यान नहीं रखा गया है, तब यह वास्तव में एक संविदा नहीं होगी, यह सिर्फ एक ठहराव होगा। लेकिन यदि उपरोक्त बिन्दुओं का ध्यान रखा गया है, तब यह एक ‘संविदा’ होगा तथा साथ ही यह एक ठहराव भी बना रहेगा। अत: यह स्पष्ट है कि एक ठहराव के बिना, संविदा संभव नहीं हो सकती। संविदा,ठहराव से उत्पन्न होती है। लेकिन सिर्फ ये ठहराव संविदा होंगे जो कानूनी या कानूनपूर्ण प्रयोजनों के लिए हैं क्योंकि सिर्फ कानूनपूर्ण प्रयोजनों वाले ठहरावों का प्रवर्तन कानून द्वारा कराया जा सकता है।

उदाहरण : कविता ने 50,000 के लिए हवाई अड्डे के साथ स्थित उसके घरों में से एक को सविता को बेचने का प्रस्ताव किया। यदि कविता उसके प्रस्ताव को पूरा नहीं करती, तब कविता न्यायालय का कानूनी संरक्षण पाने व न्यायालय के आदेश के द्वारा घर पाने की हकदार व कानूनी रूप से अधिकारी होगी, क्योंकि उसके ठहराव में एक वैद्य संविदा की सभी अनिवार्यताएं मौजूद है।

(2) कानूनी दायित्व : हर ठहराव पक्षकारों के बीच में कानूनी।दायित्व उत्पन्न नहीं करता क्योंकि कुछ ठहराव कानूनी कार्यों के लिए होते हैं तथा दूसरे गैरकानूनी कार्यों के लिए होते हैं। यदि कार्य कानूनी है, उदाहरण के लिए, मुकेश ने राजेश के साथ उसके घर को 5000 रु. में खरीदने के लिए एक ठहराव किया, तो यह एक कानूनी ठहराव होगा एवं इसलिए एक संविदा भी होगा। लेकिन यदि मुकेश राजेश के साथ एक ठहराव करता है कि वे दोनों शहर की एक जानी पहचानी कपड़े की दुकान में सेंधमारी करेंगे तथा अंतर्वस्तुओं का उनके बीच बराबर रूप से बाँट लेंगे, तब ऐसा ठहराव व्यर्थ होगा तथा कानून द्वारा प्रवर्तनीय नहीं होगा। इसकी बजाय एक दंडनीय अपराध होने के कारण, उन्हें कारावास होगा। अतः वे ठहराव जो पक्षकारों के बीच में कानूनी दायित्व निर्मित करते हैं, यदि उनमें से कोई भी पक्षकार इसके दायित्व को पूरा नहीं करता, तब संविदा को कानुन द्वारा प्रवर्तनीय कराया जा सकता है। अत: यह कहा जा सकता है कि सभी संविदाएं ठहराव होते हैं।

(II) सभी ठहराव संविदा नहीं होते :-

‘ठहराव’ का क्षेत्र काफी विस्तृत होता है, अत: इन ठहरावों में सभी प्रकार के ठहराव शामिल किए जा सकते हैं, भले ही वे कानूनी दायित्व निर्मित करते हैं या नहीं। राजनीतिक, व्यक्तिगत तथा सामाजिक दायित्वों के साथ संबंधित व्यवहार भी ‘ठहरावों’ के रूप में जाने जाएंगे लेकिन ऐसे ठहराव कानूनी दायित्व निर्मित नहीं करते। उदाहरण के लिए :

(1) राम ने रामा को खाने के लिए आमंत्रित किया लेकिन आमंत्रित करने के बाद, वह खाना नहीं परोसता। रामा का उसे हुई असुविधा या परेशानी के लिए हर्जाने के लिए कहने का कोई अधिकार नहीं होता। इसी तरह एक फिल्म शो का मजा लेना, घूमने के लिए जाना, दूसरे के साथ चाय पीना आदि कानूनी ठहराव नहीं हैं एवं इसलिए वे किसी कानूनी दायित्व को निर्मित नहीं करते। अत: ये सिर्फ ठहराव होंगे, संविदा नहीं होंगे।

(2) यदि एक ठहराव किसी विरोधी दल के सदस्य के साथ किया गया है कि राज करने वाले दल में शामिल होने के बाद वह उसके दल को बदल लेगा एवं तब उसे एक मंत्री बना दिया जाएगा। उसे एक मंत्री नहीं बनाए जाने पर वह क्षतिपूर्ति का दावा नहीं कर सकता क्योंकि यह एक राजनीतिक ठहराव है जो किसी कानूनी दायित्व को पैदा नहीं करता। अत: हालांकि यह निश्चित ही एक ठहराव है, तब भी यह एक संविदा नहीं है।

इस संबंध में मि. बाल्फोर विरुद्ध श्रीमती बाल्फोर का प्रकरण बहुत महत्त्वपूर्ण है। श्री बाल्फोर, भी श्रीलंका में काम कर रहे थे, वे उसकी पत्नी के साथ छुट्टियों के दौरान इंग्लैण्ड गए। वहाँ उसकी पत्नी बीमार हो गई तथा उसे हर महीने भेजने का वायदा करके, वह श्रीलंका वापस आ गया। लेकिन ठहराव के अनुसार, उसने रकम को नहीं भेजा। श्रीमती बाल्फोर ने उसके पति के विरुद्ध एक सिविल वाद दाखिल किया। जानकार न्यायाधीश ने कहा कि ऐसे ठहरावों के साथ कोई कानूनी दायित्व हीं होता, अत: उन्हें कानून द्वारा प्रवर्तनीय नहीं कराया जा सकता एवं इसलिए प्रकरण खारिज कर दिया गया। अत: यह स्पष्ट है कि सिर्फ वे ठहराव संविदा बन सकते हैं जो कानून द्वारा प्रवर्तनीय होते हैं। अत: सभी ठहराव संविदा नहीं बन सकते।

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