समूह व्यवहार

कोई भी संगठन उन व्यक्तियों का एकत्रीकरण मात्र नहीं होता अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए एक साथ कार्य किया करते हैं। इसमें लोगों के अनेक औपचारिक कार्य समूहों और अनौपचारिक कार्यसमूहों का तंत्र हुआ करता है। संगठन का प्रत्येक सदस्य किसी औपचारिक कार्यसमूह का हिस्सा हुआ करता है और यह स्वयं को एक या अधिक अनौपचारिक सामाजिक समूहों से संबद्ध किया करता है।

व्यक्तियों के व्यवहार और कार्य निष्पादन पर समूहों का पहला प्रभाव पड़ा करता है। समूहों और संगठनों के बेहतर प्रबंधन के लिए यह आवश्यक है कि संगठनों में समूहों के गठन, संरचना और कार्यालाप की समझ बनाई जाए।

समूह का तात्पर्य और परिभाषाएं सामान्यजनों के दृष्टिकोण से किसी निश्चित स्थान और समय पर एकत्रित लोगों का समूह का दर्जा दिया जा सकता है। फिर भी संगठनात्मक दृष्टिकोण से समूह का इससे भिन्न तात्पर्य और परिभाषा हुआ करती है। व्यापक अर्थ में समूह उसे कहा जा सकता है जो पारस्परिक संबंधों से आश्रित व्यक्तियों का एकत्रीकरण हो। समूह की औपचारिक परिभाषा इस प्रकार की गई है : “यह दो या अधिक क्रिया- प्रतिक्रियाशील व्यक्तियों का एकत्रीकरण है जो समतुल्य लक्ष्यों की ओर प्रेरित होते हैं और जो अपने आपको एक समूह के रूप में देखते-समझते

डेविड एच. स्मिथ के अनुसार, “समूह को दो या अधिक व्यक्तियों का जोड़ माना जा सकता है जिनमें प्रासंगिक संप्रेषणों के आदानप्रदान के संबंध का गुण हो, सामाजिक परिचय की आपसी समझ हो और उनमें सहयोजित मानकीकृत सामर्थ्य के साथ एकाधिक संगत मनोवृत्तियों का समावेश हो।’ मार्विन शॉ के अनुसार, समूह वह है जिसमें दो या अधिक व्यक्ति एक ऐसे ढंग परस्पर क्रिया-प्रतिक्रिया करते हैं कि उनमें से
प्रत्येक अन्य को प्रभावित करता है अथवा उससे प्रभावित हुआ करता है।

ई.एच. ग्रीन ने व्यक्तियों की किसी भी संख्या को तब समूह मानने की बात कही है जब वे उसकी विहित तीन शतों को पूरा करते हों।

ये तीन शर्त हैं:

1. लोग परस्पर क्रिया-प्रतिक्रिया करें
2. मनोवैज्ञानिक तौर पर वे एक-दूसरे के प्रति जागरूक हों, और
3.उनमें अपने आपको एक समूह के रूप का बोध हो।

यदि परीक्षण की इन शर्तों को कार्यरूप दिया जाए तो लोगों के अनेक एकत्रीकरणों को समूह की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता, उदाहरणस्वरूप बस-स्टॉप पर खड़ी भीड़ जिसे बसों की प्रतीक्षा करने मात्र से समूह का दर्जा नहीं दिया जा सकता।

उपरोक्त परिभाषाओं को चार-संक्षिप्त रूप में समेटते हुए कहा जा सकता है कि व्यक्तियों को उस छोटी संख्या के जोड़ को समूह कहा जा सकता है जो समतुल्य लक्ष्यों की दिशा में काम करते हैं, सहभागी  मनोवृत्ति विकसित करते हैं और यह समझते हैं कि वे एक निर्दिष्ट समूह के अंश हैं और सचमुच ही ऐसा सब कुछ मानते हैं। इस तरह, लोगों के प्रासंगिक जोड़ या जमाव को समूह का दर्जा नहीं दिया जा सकता क्योंकि वे एक दूसरे के प्रति जानकार नहीं होते अथवा हुए भी तो सार्थक रूप से परस्पर क्रिया-प्रतिक्रिया नहीं किया करते।

समूह की विशेषताएं  उपरोक्तानुसार हम यह कह सकते हैं कि समूह

1. दो या अधिक व्यक्तियों का एकत्रीकरण है।

2. उसके समरूप लक्ष्य या हित हैं जिसमें उनकी भागीदारी हो।

3. अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए परस्पर क्रिया-प्रतिक्रिया करते
हो।

4. अपने आपको समूह का अंश मानते हों।

5. अपनी सामूहिक पहचान हो।

समूहों की प्रकृति

व्यावसायिक विशाल उद्योग जैसे टोयोटा, मोटोरोला, जनरल माइल्स एवं जनरल इलेक्ट्रॉनिक समूहों का उपयोग करते वाले प्रथम थे। आज अधिकतर संगठन विशिष्ट परिणामों को प्राप्त करने के लिए विभिन्न प्रकार के समूहों को निर्मित करते हैं।

हेरॉल्ड एच. कैली एवं जे.डब्ल्यू. थोबाउट एक समूह का वर्णन “व्यक्तियों का संग्रह …सदस्य समान कार्य को स्वीकार करते हैं, अपने प्रदर्शन में अंत:निर्भर बनते हैं,एवं इसकी उपलब्धि को बढ़ावा देने के लिए अन्य लोगों में परस्पर मेल करते हैं।’ की तरह करते हैं।

एक संगठन में, समूह के सदस्य

1. समूह की गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित किए जाते हैं।

2. समूह को सदस्यों (लोगों) का परस्पर मेल कराने वाली एकरूप सत्ता की तरह देखते हैं।

3.समूह की गतिविधियों के लिए अपने समय एवं ऊर्जा की अलग-अलग मात्राओं का योगदान करते हैं। एवं

4.परस्पर मेल के विभिन्न रूपों के माध्यम से समूह के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर एक समस्या के बारे में समझौते पर पहुंचते हैं।

विभिन्न परस्पर क्रियाएं जो समूह के सदस्यों के बीच घटित होती हैं, वे समूह डायनेमिक्स का निर्माण करती हैं। “ग्रुप डायनेमिक्स” शब्द को प्रबंधन विचारक, कर्टलेविन द्वज्ञरा 1930 में लोकप्रिय किया गया।

ग्रुप डायनेमिक्स की प्रकृति के संबंध में तीन मत हैं। नॉमेटिवमत वर्णित करता है कि समूह को कैसे संगठित किया जाना है एवं इसकी गतिविधियों का कार्यान्वयन किस प्रकार किया जाना है। यह मत लोकतांत्रिक नेतृत्व, सदस्यों की भागीदारी एवं उनके बीच सहयोग पर प्रभाव डालता है। द्वितीय मत के अनुसार, ग्रुप डायनेमिक्स तकनीकों के एक सेट से बना होता है। इन तकनीकों में भूमिका निभाना, ब्रेनस्टॉर्मिंग, संवेदनशीलता, प्रशिक्षण, टीम निर्माण, व्यापार विश्लेषण, जोहरी विण्डो एवं स्वय प्रबंधित टीमें सम्मिलित होती हैं। अंतत: तृतीय मत गुप डायरेमिक्स को यह मत वर्णित समूहों के आंतरिक प्रकृति के स्वरूप से समीप करता करता है कि समूहों का निर्माण केसे होता है, उनकी सरचना, मध्य प्रक्रिया एवं कार्य का वर्णन। यह इसका भी वर्णन करता है कि समूह व्यक्तिगत सदस्यों अन्य समूहों एवं संगठन को किस प्रकार प्रभावित करते है।

You may also like...