सामाजिक मार्केटिंग

सामाजिक विपणन सामाजिक लाभप्रद विचारों या व्यवहारों को फैलाने हेतु विपणन विधियों का अनुप्रयोग है। यह बड़े हितधारकों के व्यवहार को परिवर्तित करने हेतु एक रणनीति है। यह सामाजिक परिवर्तन के परंपरागत दृष्टिकोण के सर्वश्रेष्ठ तत्त्वों को एकीकृत नियोजन तथा क्रिया फ्रेमवर्क में साझा करती है तथा विस्तृत जनता तक पहुँचने हेतु अग्रिम नियोजन उपकरणों तथा तकनीकों का प्रयोग करता है। सामाजिक विपणन को एक लक्ष्यित जनता के व्यवहार को प्रभावित करने हेतु डिजाइन किया जाता है जिसमें विपणनकर्ता चाहते हैं कि व्यवहार के लाभ प्राथमिकत: सामान्यतः जनता या समाज को मिलें, न कि विपणनकर्ता को। सामाजिक विपणन को कई बार विपणन के सामाजिक प्रभाव से भ्रमित किया जाता है। व्यक्ति, सार्वजनिक तथा निजी गैर-लाभ संगठन तथा लाभ-अभिमुखी संगठन सामाजिक विपणन कार्यक्रम लागू कर सकते हैं।

शब्दावली ‘सामाजिक विपणन’ को प्रथम बार 1971 में सामाजिक कारण, विचारों तथा व्यवहार को संवर्धित करने हेतु विपणन उपकरणों तथा तकनीकों के बढ़ते प्रयोग को वर्णित करने के लिए किया गया था। इसे उन प्रोग्रामों के डिजाइन, क्रियान्वयन तथा नियंत्रण सहित सामाजिक परिवर्तन प्रबंध तकनीकी के रूप में जाना जाता है जिनका लक्ष्य लक्षित अपनाने वाले समूहों के बीच में एक सामाजिक विचार, कारण या अभ्यास की स्वीकार्यता को बढ़ाना होता है।

सामाजिक विपणनकर्ता, बाजार विभक्तीकरण, उपभोक्ता शोध, सामाजिक उत्पाद डिजाइन तथा विकास, संचार तथा अभियान प्रबंध की अवधारणाओं का प्रयोग लक्ष्य अपनाने वाली श्रेणी प्रत्युत्तर दर को अधिकतम करने के लिए करते हैं। सामाजिक विपणनकर्ता परिवर्तन लक्ष्यों का इस अनुमान के साथ पीछा करता है कि यह समाज से समग्र रूप में बेहतर न्याय करेगा। सामाजिक विपणनकर्ता उन विचारों परिवर्तन चाहता है जो लोगों के उद्देश्यों, व्यवहारों तथा संस्कारों की तरफ रखते हैं। ये सामाजिक विपणन कार्यक्रम के अंतिम लक्ष्य हैं। अत: हम कह सकते हैं कि ‘विचार’ तथा व्यवहार लक्षित अपनाने वाले समूहों तक विपणित किए जाने वाले सामाजिक उत्पाद हैं। कोटलर तीन तरह के सामाजिक उत्पादों को परिभाषित करता है अर्थात् विचार, व्यवहार तथा मूर्त ऑब्जेक्ट।

सामाजिक विचार विश्वास, अभिवृत्ति या मूल्य का रूप ले सकते हैं। सिगरेट पीने से कैन्सर होता. है यह एक विश्वास है जो सभी कैंसर संबंधित अभियानों से समाज में सिगरेट पीने के विरुद्ध विचारों को संवर्धित करवाता है। एक विश्वास एक वर्णनात्मक विचार है जो लोग ऑब्जेक्ट्स तथा तथ्यों के प्रति रखते हैं। सामाजिक विपणन अभियानों का प्रयोग लक्षित जनता के विश्वासों तथा/या अंध विश्वासों को प्रभावित करने के लिए किया गया है। सामाजिक विचार एक विश्वास के रूप में हो सकता है। परिवार नियोजन अभियानों द्वारा एक खुश तथा छोटे परिवार का विश्वास प्रस्तावित किया जाता है। अभिवृत्ति एक उत्साहवर्धक पूर्वानुकूलता है-व्यक्तियों, ऑब्जेक्ट्स, विचारों या घटनाओं का एक सकारात्मक या नकारात्मक मूल्यांकन। नई राजनीतिक अभियान वास्तव में लोगों के राजनीतिक दलों व उनकी विचारधाराओं के प्रति अवबोध तथा अभिवृत्ति को प्रभावित करने की तरफ लक्ष्यित होते हैं। सामाजिक विचार मानवीय अधिकारों, बच्चों के अधिकारों आदि हेतु एक मूल्य सकता है। ये इस बारे में समग्र विचार है कि क्या सही तथा गलत है। सामाजिक उत्पादों की दूसरी श्रेणी एक सामाजिक व्यवहार है। यह व्यवहार की वैकल्पिक प्रवृत्ति की एकल actor स्थापना का होना हो सकता है। पोलियो अभियान सामाजिक व्यवहार का एक उदाहरण है जो एक प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में आने व पोलियो-निरोधी चलन में भाग लेने के एक अकेली क्रिया के होने के रूप में प्रदर्शित होती है। भारत में सती के निवारण की तरफ लक्षित अभियान, आदिवासियों द्वारा बेहतर फसलों हेतु जानवरों के त्याग के बारे में अंध विश्वास सामाजिक व्यवहार की वैकल्पिक प्रवृत्तियों को स्थापित करने के प्रयत्नों के उदाहरण हैं।

सामाजिक उत्पाद की तीसरी श्रेणी एक मूर्त उत्पाद है जैसे परिवार नियोजन हेतु गर्भ निरोधकों, पिल्स, कॉपर-टी का उपयोग या निर्जलीकिरण से लड़ने हेतु ORs का प्रयोग। इन प्रकरणों में प्रमुख उत्पाद भौतिक उत्पाद नहीं है बल्कि ये क्रमशः परिवार नियोजन तथा बच्चे की मृत्यु को बचाने को प्राप्त करने हेतु औजारों के रूप में कार्य करते हैं। मूर्त उत्पाद भौतिक उत्पाद है जो सामाजिक अभियान के साथ रहते हैं। सामाजिक विपणनकर्ता व्यवहार तथा सामाजिक व्यवहारों को बदलने हेतु विचारों को संवर्धित करते हैं। जहाँ सामाजिक विज्ञापनकर्ता चाही गई सूचना के प्रचार से संतुष्ट होता है, सामाजिक विपणनकर्ता एक कदम आगे जाकर, नई अवधारणा को अपनाता है या खरीदता है तथा सामाजिक उत्पाद या विचार को उसके लाभ के लिए प्रयोग करता है।

सामाजिक विपणनकर्ता को एक जटिल स्थिति में कार्य करना पड़ता है जिसमें उसे बहुल हितधारकों को लक्षित करना होता है। कई बार एक या ज्यादा हितधारकों के एक दूसरे के विरुद्ध विचार होते हैं, अत: एक सामाजिक उत्पाद अभियान को विकसित करते समय, विपणनकर्ता को लक्षित अपनाने वाले ‘बाजार खंड’ तथा उनसे संचारित करने हेतु संदेश को चुनने में सावधान होना होता है। सामाजिक विपणनकर्ता को हर लक्षित अपनाने वाले समूह के बारे में जानकारी की जरूरत होती है तथा उसे लक्षित अपनाने वाले समूह के बारे में निम्न सूचना को संग्रहित करने
की जरूरत होती है-

(i) सामाजिक-जनांकिकीय विशेषताएं– इनमें उपभोक्ता के गैर- व्यवहारात्मक लक्षण शामिल हैं जैसे आयु, लिंग, आय, आजीविका, सामाजिक वर्ग, शिक्षा तथा परिवार का आकार।

(ii) मनोवैज्ञानिक रूपरेखा– इसमें आंतरिक गुण शामिल होते हैं जैसे मनोवृत्ति, मूल्य, अभिप्रेरणा तथा व्यक्तित्व।

(iii) व्यवहारात्मक विशेषताएं– इनमें शामिल हैं व्यवहार की प्रवृत्तियाँ, क्रयण आदतें तथा निर्णयन विशेषताएं। सामाजिक विपणनकर्ताओं को संदर्भ समूहों तथा राज नेताओं को पहचानने की जरूरत होती है। ये व्यक्ति प्रभाव धारण समूह या प्रभावी
लोग कहलाते हैं जो किसी विपणन कार्यक्रम की प्रभाविता को प्रभावित कर सकते हैं। ये समूह निम्न तरह वर्गीकृत होते हैं-

(i) अनुमति देने वाले समूह– ये विनियामक संस्थाएं हैं जिनकी अनुमति या कानूनी अधिकृतीकरण की कार्यक्रम को शुरू करने के लिए जरूरत होती है।

(ii) समर्थन समूह– ये चिकित्सक गाँव के स्तर के कर्मचारी,दाइयों तथा अन्य स्वास्थ्य कर्मचारी होते हैं जिनकी सहायता एक सामाजिक विपणन कार्यक्रम को विकसित करने हेतु जरूरी होती है।

(iii) विपक्षी समूह– ये वे समूह है जो सामाजिक विपणन कार्यक्रम द्वारा प्रचारित किए जाने वाले विचारों या व्यवहार के विरोध में होते हैं। इन समूहों में धार्मिक समूह तथा नैतिक समूह शामिल होते हैं।

(iv) मूल्यांकन समूह– ये विधायिका समितियाँ हैं जिनके बाद के मूल्यांकन का सामाजिक विपणन कार्यक्रम पर लाभकारी या प्रतिकूल प्रभाव हो सकता है।

सामाजिक विपणनकर्ता को उत्पाद-बाजार fit का विश्लेषण करके एक सामाजिक विपणन कार्यक्रम को विकसित करने की जरूरत होती है। सिर्फ लक्षित बाजार संघटन को छोड़कर यह परंपरागत विपणन कार्यक्रम में उत्पाद-बाजार fit की अवधारणा के समान है। सामाजिक विपणनकर्ता को या तो वर्तमान सामाजिक मुद्दों की जरूरतों में fit होने हेतु एक नए उत्पाद को निर्मित करने चाहिए या खंडों को बेहतर सेवा देने हेतु वर्तमान सुधारना चाहिए। उसे सामाजिक विपणन शोध के आयोजन के द्वारा करने का प्रयत्न करना चाहिए। उत्पाद बाजार की मात्रा जितनी ऊंची होगी, उतनी ही ज्यादा सामाजिक विपणन कार्यक्रम से ग्राहक मूल्य की पहचान करेगा। इसके बाद सामाजिक विपणनकर्ता को एक सुपुर्दगी मॉडल के द्वारा लक्षित बाजार को हल पेश करना चाहिए। विपणनकर्ता को fit को सामाजिक विचार या व्यवहार की संबंधित स्थितिकरण में अनुवादित करना चाहिए, चुनी गई स्थितिकरण को संचारित करने हेतु एक विपणन कार्यक्रम को डिजाइन करना चाहिए तथा उस कारण हेतु एक पुनर्बाध्य करने वाले छवि को विकसित करना चाहिए जो कारण की प्रकृति के अनुरूप है। समय गुजरने के साथ, उसे स्थितिकरण का बचाव करना चाहिए तथा कार्यक्रम सुपुर्दगी की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करके मूल्य प्रस्ताव को मध्यम करना चाहिए। यह वैज्ञानिक दृष्टिकोण एक सामाजिक विपणन कार्यक्रम को दीर्घकाल में प्रभावी तथा संघृतकारी बनाएगा।

You may also like...